आँख से छलके हुए आंसू से
भीगा-मै था
उस झील की गहराई में कुछ
दूर तक उतरा ही था
जल परी -ख्वाब के महलों में
रसातल जाऊं
जम गए बूँद -बिंदु-झील
बस डूबा जाऊं
पानी पत्थर भी जम के हो जाते
चाहता रह गया -
दुनिया को कैसे बतलाऊँ !!
शुक्ल भ्रमर ५
जल पी बी १८.७.११ - ८.१० -मध्याह्न
Dadi Maa sapne naa mujhko sach ki tu taveej bandha de..hansti rah tu Dadi Amma aanchal sir par mere daale ..join hands to improve quality n gd work