RAS RANG BHRAMR KA WELCOMES YOU

Sunday, March 6, 2011

सांस छोड़ दो -पेट पचा लो कमर से चिपकी –बाबा भ्रमर-देव बन जाना



मन में आता
छोड़ -'नवु-करी
मै बाबा -बन जाऊं
दुनिया भर के चेले -'चापर"
लेकर योग सिखाऊँ
बाबा "भ्रमरदेव" बन जाऊं
'पुरुष' बनो -
नारी से तुम भी
सांस छोड़ दो
पेट पचा लो -
कमर से चिपकी
बन हीरो-इन -हीरो नाचो
फीस भरो आ- 
नाम लिखा लो 
देश -विदेश जहाँ भी जाओ 
बाबा संग तुम -  नाम कमाओ 
"पेट नहीं"- पिचका- दिखलाओ 
'वो' जब  जाने -तुम ना खाते
"पिचकी" -पिचकारी
रंग भरें 'वो' -फूल -फूल
तुम मेरे जैसा
गुब्बारा बन -उड़ते रहना
आसमान में !!
आँख -पलक झपकाते रहना
डरना-ना
"वो" ना -समझें -
आँख-मिला-ना
सम्मोहित कर
सब अपना-ना
बाबा 'भ्रमरदेव' के संग-
संग -प्यारे
देश का अपने
नाम डुबा-ना .
आँखे बंद करा के तेरी
“कंसंट्रेट” सिखाऊँ
भरमाऊँ
झोली अपनी भर के लाऊं

जब “धन” होगा -तो “मन” होगा
“होश” -  “जोश” जागेगा
विश्व -गुरु हम- बन जाए-
कल देश हमारा -
हाँ या ना-ना ????
चिल्लाओ कुछ -
 ताली पीटो- 
मूक बनो -ना 
“कल” - देखना
वादा अपना –सपना- अपना
हम ना ‘गिरगिट’
रंग न बदलें

सन्यासी हैं
वनवासी हैं
वन में जितने भी राक्षस हैं 
दमन करूँगा -
'इन ' जादूगर “काले” -वालों
से भैया मै
तभी - भिडूंगा
इसी अखाड़े
"नाग-पंचमी' के दिन
सब मिल- “डंडा” लाना
आना- हमको “साहस” देना
“जोश”- जगाना
देख -पटखनी
“खुश” हो - जाना


शुक्लाभ्रमर५
५.३.२०११ जल पी बी

kal fir aayenge aur koi kachchi kaliyan chunne vaale..ham sa behtar kahne vaale tum sa behtar sunne vale-Bhrmar ..join hands to improve quality n gd work
 

2 comments:

राज भाटिय़ा said...

जनाब आप के तीनो ब्लाग शामिल कर लिये हे. धन्यवाद

Surendra shukla" Bhramar"5 said...

आदरणीय राज जी --आप ने मेरे तीनो ब्लॉग ,भ्रमर का दर्द , भ्रमर, और रस रंग को शामिल किया --बहुत सारा धन्यवाद इस शुभ काम का जो बीड़ा आपने उठाया है -कल्याणकारी हो .साभार
शुक्लाभ्रमर५