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Sunday, July 24, 2011

आँख से छलके हुए आंसू- (बेवफाई )


आँख से छलके हुए आंसू से 
भीगा-मै था 
उस झील की गहराई में कुछ 
दूर तक उतरा ही था 
जल परी -ख्वाब के महलों में 
रसातल जाऊं 
जम गए बूँद -बिंदु-झील 
बस डूबा जाऊं 
पानी पत्थर भी जम के हो जाते 
चाहता रह गया -
दुनिया को कैसे बतलाऊँ !!

शुक्ल भ्रमर ५ 
जल पी बी १८.७.११ - ८.१०  -मध्याह्न  



Dadi Maa sapne naa mujhko sach ki tu taveej bandha de..hansti rah tu Dadi Amma aanchal sir par mere daale ..join hands to improve quality n gd work

6 comments:

Sunil Kumar said...

बहुत सुन्दर भावाव्यक्ति, बधाई

Surendra shukla" Bhramar"5 said...

प्रिय सुनील कुमार जी अभिवादन और हार्दिक अभिनन्दन आप का रस रंग -भ्रमर का में -
बेवफाई आप को भायी-और आप का समर्थन मिला -
आभार
शुक्ल भ्रमर ५

Babli said...

वाह! क्या बात है!अद्भुत सुन्दर! दिल को छू गई!

Surendra shukla" Bhramar"5 said...

प्रिय बबली जी हार्दिक अभिवादन -आँख से छलके हुए आंसू -रचना मन को भायी सुन हर्ष हुआ
प्रोत्साहन के लिए आभार
शुक्ल भ्रमर ५

मनोज कुमार said...

सुंदर, अति सुंदर।

Surendra shukla" Bhramar"5 said...

आदरणीय मनोज जी हार्दिक अभिवादन -आँख से छलके हुए आंसू आप के मन को छू सके -सुन हर्ष हुआ प्रोत्साहन के लिए आभार